2 thoughts on “Book review by Anshika Saxena”

  1. अंशिका बिटिया सब से पहले आप को सबसे पहले मुंशी प्रेमचंद जी की ऐसी कहानी को चुना है जो बहुत से लोगों को ध्यान में नहीं है। यह एक ऐसी कहानी है जो बालमन में उठे भावों को प्रकट करतीहै.।
    सबसे पहले आप को सरल भाषा, सुंदर वाक्य विनयास, व समीक्षा के लिए बधाई । हिंदी की अनेक कहानियाँ रिश्तों की खूबसूरती को ब्यान करती है.
    ऐसी ही एक और कहानी *काबुलीवाला* रविंद्रनाथ टैगोर की हे जो पिता और बेटी के प्रेम की सुंदय अभिव्यक्ति है ।जिस पर काबुलीवाला फिल्म बनी थी।
    आकांक्षा आप को भी बधाई कि आप की यह यात्रा अब नया मोड़ ले रही है ।बच्चे हिंदी की ओर आकर्षित होंगे ।प्रयास जारी रखिए ःः

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  2. अंशिका बिटिया आप को दिल की गहराई से आशीर्वाद।आज जब सब अंग्रेजी की कहानियो को पढ़ने में दिलचस्पी ले रहे हैं । आप ने मुंशी प्रेमचंद की एक ऐसी कहानी को सब के सामने ना सिर्फ रखा पर विशलेषण किया। आप की समझ और सरल पर असरदार वाक्य रचना ने खुश किया ।प्रेमचंद की कयी कहानियाँ रिश्तों की खूबसूरती को हमारे सामने लाती हैं
    रिश्तों को संभालना बड़ी बात है
    आकांक्षा आप को भी बधाई। कुछ नया सकरात्मक आ रहा है
    कज़ाकी जैसी ही एक कहानी रविंद्रनाथ टैगोर की काबुली वाला है
    पिता पुत्री के प्रेमिल रिश्ते को सुंदर तरीके से बताती है
    इस पर काबुलीवाला फिल्म भी बनी थी।

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