गजपति कुलपति गुर्बरम

पुस्तक समीक्षा

कहानी : अशोक राजगोपाला

अनुवाद : सुषमा रोशन

प्रकाशक : तुलिका

आयु वर्ग : 2 से 4( पढ़ के सुनाए )

4 से 6( साथ में पढ़ें )

क़ीमत : 135/-

बड़े बड़े कान , बड़ा सा शरीर . बड़ी सी सूँड़, बड़े बड़े दाँत और लम्बी सी पूँछ ! बिलकुल सही पहचाना, जिस जानवर की मैं बात कर रही हूँ वो है हाथी और उसका नाम है गजपति कुलपति । वह एक बड़ा ही प्यारा हाथी है जिसे सब पसंद करते हैं ।

एक दिन सभी लोग गजपति को प्यार से ढेर सारा भोजन करा देते हैं । मगर फिर क्या होता है ? गजपति कुलपति क्यूँ इतना परेशान और बेचैन हो जाता है ?

कहानी पढ़ के जानिए की कौन गजपति की मदद करता है और कैसे वह पहले जैसा मस्त हाथी बन जाता है ?

इस पुस्तक के चित्र बड़े ही रंग बिरंगे हैं। कहानी भी बड़ी मज़ेदार और हँसाने वाली है । बच्चे इसका ख़ूब आनन्द उठाएँगे।

⭐️⭐️⭐️⭐️

धन्यवाद

आकांक्षा दत्ता

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