मीनू और उसके बाल

पुस्तक समीक्षा

लेखक: गायत्री बाशी

अनुवाद : सुषमा आहूजा

संपादक: तुलिका

आयु वर्ग : ३ से ६ वर्ष

सभी को अपने बालों से बड़ा प्रेम होता है । मुझे तो है । मुझे उन्हें सवारना बेहद पसंद है और क्यूँ ना हो , बाल आपकी ख़ूबसूरती बढ़ाते हैं । पर मीनू ऐसा नहीं सोचती ! उसे अपने बाल बिलकुल पसंद नहीं हैं क्यूँकि वे लम्बे और बहुत घुंघराले हैं ।

मीनू को अपने बाल चिड़िया का घोंसला लगते हैं और उसे लगता है कि वो दो सिंगो वाली गाय है । मीनू को अपने बाल सुलझाना बिलकुल भी पसंद नहीं है ।

घर के सभी सदस्य उसके बाल सवारने की कोशिश करते हैं सिवाय उसके दादाजी के । उन्हें कोई चिंता नहीं है क्यूँकि वे जानते हैं मीनू को कैसे समझना है ।

इस किताब के चित्र बड़े ही सुंदर हैं । उन चित्रों के द्वारा आप एक अलग ही दुनिया में पहुँच जाओगे।

बच्चों की कल्पनाओं को एक नयी उड़ान मिलेगी।

उन्हें यह कहानी बड़ी मज़ेदार लगेगी ।

ज़रूर पढ़ें ।

⭐️⭐️⭐️⭐️

धन्यवाद

आकांक्षा दत्ता

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